बंद पलकों की दुनिया
Monday, September 20, 2021
सवेरा
Tuesday, July 20, 2021
तुम्हारी आँखों से
Sunday, June 20, 2021
नहीं जानती मैं प्रेम की ठीक-ठीक परिभाषा
बस इतना जानती हूँ
उसका साथ अच्छा लगता है
उतनी देर को ये दुनिया कोई और ही दुनिया लगती है,
सब कुछ बहुत ही खूबसूरत होता है।
समय को रोक लेने को मन होता है और समय को जैसे पंख लग जाते हैं।
उसको मुस्कराते देख दुःख पिघलने लगते हैं
उसकी हँसी सुन हर दर्द दम तोड़ देता है
उससे बात करके मन का हर बोझ हल्का हो जाता है
मेरे मन का शांतिदूत है वो
उसके लिए कुछ भी कर गुज़रने का मन होता है।
उसकी एक चाहत के लिए हर हद से गुज़रने का मन होता है।
उसके सामने जीवन की सब हकीकतें भूल
मन बच्चा बन जाना चाहता है।
खिलखिलाना चाहता है।
ज़िद करना चाहता है
शरारत करना चाहता है।
मन भूल जाना चाहता है दुनिया की रवायतें
तोड़ना चाहता है समाज के बनाए सारे बंधन
भूल कर उम्र की सीमा
उड़ना चाहता है उन्मुक्त पंक्षी की तरह।
प्रार्थनाओं में सारी दुनिया के बदले उसको मांग लेने का मन होता है।
अपने जीवन का हर पल उसके नाम कर देने का मन होता है।
सुबह आँख खुलने और रात में सोने तक ही नहीं
जीवन के आखिरी क्षण में आँखें बन्द होने तक
सिर्फ उसको देखने का मन होता है।
अगर ये प्रेम है, तो हाँ मुझे प्रेम है उससे
-सुमन शर्मा
Wednesday, April 14, 2021
आईना और अक्स
आईना और अक्स
तुम अपलक निहारते हो मुझे
तुम्हारी आँखों में ठाठें मारते
प्रेम की लहरों में गोते लगाते
तभी मेरी नजर पड़ती है
साहिल पर खड़ी एक परछाई पर
जो मेरा आभास मात्र नहीं
उतना ही सत्य है जितना कि मेरा प्रेम
और मैं अचानक से दर्द के समंदर में डूबने लगती हूँ...!
एकाकी पलों में तुम मेरा हाथ थामे
स्वीकार करते हो जब
कि अब तुम्हें कुछ याद नहीं रहता मेरे सिवा
तुम विह्वलता से बार-बार मेरा नाम पुकारते हो
कि ठीक उसी वक़्त एक नाम
आ जाता है तुम्हारी जुबां पर
और मेरी सारी मुस्कराहटें आँसू बनकर
आँखों से बरसने लगती हैं.....
जब भी बुनती हूँ सपने
तुम भरते हो उसमें अपने चाहत का रंग
बड़ी तन्मयता से उकेरते हो
मेरे समर्पित प्रेम को
मैं खुशी से झूम झूम जाती हूँ
तभी तुम्हारी पलकों में कौंध जाता है एक चित्र
और मैं खिलखिलाते हुए अचानक ही उदास हो जाती हूँ....
खिले मोंगरे सी तुम्हारी बातें
महकता है जिसमें ज़िक्र मेरा
क्यों इतनी अच्छी लगती हूँ तुम्हें
जाने कितनी उपमाओं से तुम करते हो श्रृंगार मेरा
इस बात से बेख़बर
कि तुम्हारी एक उपमा की चुभन
चीर जाती है मेरा हृदय
और मेरी साँस थमने लगती है...!
मेरा दर्द में डूब जाना,आँखों का बरसना
उदास जो जाना और मेरी साँसों का थमना
मैं जानती हूँ
नहीं समझ पाते हो तुम
इस अचानक हुए परिवर्तन को
काश!समझ पाते
कि मेरा आईना हो तुम
जिसमें और कोई अक्स
मुझे गँवारा नहीं....!
-सुमन शर्मा
Thursday, April 8, 2021
याद है अभी तक
Thursday, March 25, 2021
दुनिया खुली आँखों का ख़्वाब ही रही
जिन पलों में मुझे सबसे ज़्यादा खुश होना था
सबसे ज़्यादा दुःखी हुई हूँ
जिन पलों में मुझे कहकहे लगाने थे
रोते रोते हिचकियाँ बंध गईं
जब मुझे हवा के परों पर सवार हो
उड़ना था ख़ुशी से
आसुंओ को रोकने की नाकाम कोशिश में
धरती में गड़ जाना चाही
इंतज़ार के लंबे फेहरिस्त में
कुछ दिन ऐसे भी होते
जिस दिन तुम्हारा हाथ थामे
एक-एक पल को जीना था
ठीक उसी रोज छोड़ गए अकेले
मेरी दुनिया खुली आँखों का ख़्वाब ही रही!
-सुमन शर्मा
25/3/2021
Friday, March 19, 2021
तुम सभी मौसमों का समन्वित रूप हो
सवेरा
खोलो पलकें कि उजाला हो ख़्वाबों में कैद रहा है सूरज रात भर अब तो कर दो आज़ाद कि सवेरा हो मुस्कराओ कि खिल जाएं कलियां सारी ख़ुशबू बिखर जाए हवा...
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नहीं जानती मैं प्रेम की ठीक-ठीक परिभाषा बस इतना जानती हूँ उसका साथ अच्छा लगता है उतनी देर को ये दुनिया कोई और ही दुनिया लगती है, सब कुछ बह...
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उसने कहा, 'तुम्हारी बातों में वज़न होता है' मैंने हंसते हुए पूछा,"कितना? उसने बड़ी गम्भीरता से कहा, 'जिसके नीचे मेरा सारा अप...
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तुम सभी मौसमों का समन्वित रूप हो.... __________________________________________ जब भी तुम्हें देखती हूँ तो मन में ये ख़याल आता है कि वो कौन ...