जिन पलों में मुझे सबसे ज़्यादा खुश होना था
सबसे ज़्यादा दुःखी हुई हूँ
जिन पलों में मुझे कहकहे लगाने थे
रोते रोते हिचकियाँ बंध गईं
जब मुझे हवा के परों पर सवार हो
उड़ना था ख़ुशी से
आसुंओ को रोकने की नाकाम कोशिश में
धरती में गड़ जाना चाही
इंतज़ार के लंबे फेहरिस्त में
कुछ दिन ऐसे भी होते
जिस दिन तुम्हारा हाथ थामे
एक-एक पल को जीना था
ठीक उसी रोज छोड़ गए अकेले
मेरी दुनिया खुली आँखों का ख़्वाब ही रही!
-सुमन शर्मा
25/3/2021
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