Thursday, March 25, 2021

दुनिया खुली आँखों का ख़्वाब ही रही

 जिन पलों में मुझे सबसे ज़्यादा खुश होना था

सबसे ज़्यादा दुःखी हुई हूँ

जिन पलों में मुझे कहकहे लगाने थे

रोते रोते हिचकियाँ बंध गईं


जब मुझे हवा के परों पर सवार हो

उड़ना था ख़ुशी से

आसुंओ को रोकने की नाकाम कोशिश में

धरती में गड़ जाना चाही


इंतज़ार के लंबे फेहरिस्त में

कुछ दिन ऐसे भी होते 

जिस दिन तुम्हारा हाथ थामे 

एक-एक पल को जीना था

ठीक उसी रोज छोड़ गए अकेले 


मेरी दुनिया खुली आँखों का ख़्वाब ही रही!


-सुमन शर्मा


25/3/2021

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