Sunday, June 20, 2021

 नहीं जानती मैं प्रेम की ठीक-ठीक परिभाषा 

बस इतना जानती हूँ

उसका साथ अच्छा लगता है

उतनी देर को ये दुनिया कोई और ही दुनिया लगती है,

सब कुछ बहुत ही खूबसूरत होता है।

समय को रोक लेने को मन होता है  और समय को जैसे पंख लग जाते हैं।


उसको मुस्कराते देख दुःख पिघलने लगते हैं

उसकी हँसी सुन हर दर्द दम तोड़ देता है

उससे बात करके मन का हर बोझ हल्का हो जाता है

मेरे मन का शांतिदूत है वो


उसके लिए कुछ भी कर गुज़रने का मन होता है।

उसकी एक चाहत के लिए हर हद से गुज़रने का मन होता है।

उसके सामने जीवन की सब हकीकतें भूल 

मन बच्चा बन जाना चाहता है।

खिलखिलाना चाहता है।

ज़िद करना चाहता है

शरारत करना चाहता है।

मन भूल जाना चाहता है दुनिया की रवायतें

तोड़ना  चाहता है समाज के बनाए सारे बंधन

भूल कर उम्र की सीमा 

 उड़ना चाहता है उन्मुक्त पंक्षी की तरह।


प्रार्थनाओं में सारी दुनिया के बदले उसको मांग लेने का मन होता है।

अपने जीवन का हर पल उसके नाम कर देने का मन होता है।

सुबह आँख खुलने और रात में सोने तक ही नहीं

जीवन के आखिरी क्षण में आँखें बन्द होने तक 

सिर्फ उसको देखने का मन होता है।


अगर ये प्रेम है, तो हाँ मुझे प्रेम है उससे


-सुमन शर्मा

सवेरा

खोलो  पलकें कि उजाला हो ख़्वाबों में कैद रहा है सूरज रात भर अब तो कर दो आज़ाद कि सवेरा हो मुस्कराओ कि खिल जाएं कलियां सारी  ख़ुशबू बिखर जाए हवा...