Monday, September 20, 2021

सवेरा



खोलो  पलकें कि उजाला हो
ख़्वाबों में कैद रहा है सूरज रात भर
अब तो कर दो आज़ाद कि सवेरा हो

मुस्कराओ कि खिल जाएं कलियां सारी
 ख़ुशबू बिखर जाए हवाओं में
मदहोश हुआ जाता है जो सारा आलम
लो अंगड़ाई कि तिलिस्म टूटे

तुम्हारी अलसाई पलकें चूमने को
बेचैन है पहली किरण
बदलो जो करवट  इधर
नींद से जाग जाए जग सारा

-सुमन शर्मा

सवेरा

खोलो  पलकें कि उजाला हो ख़्वाबों में कैद रहा है सूरज रात भर अब तो कर दो आज़ाद कि सवेरा हो मुस्कराओ कि खिल जाएं कलियां सारी  ख़ुशबू बिखर जाए हवा...