उसने कहा,
'तुम्हारी बातों में वज़न होता है'
मैंने हंसते हुए पूछा,"कितना?
उसने बड़ी गम्भीरता से कहा,
'जिसके नीचे मेरा सारा अपराधबोध दब जाता है'
-सुमन शर्मा
खोलो पलकें कि उजाला हो ख़्वाबों में कैद रहा है सूरज रात भर अब तो कर दो आज़ाद कि सवेरा हो मुस्कराओ कि खिल जाएं कलियां सारी ख़ुशबू बिखर जाए हवा...
वजन तो होता है :)
ReplyDeleteकम शब्दों में appropriate ....
ReplyDeleteशुक्रिया इस हौसलाअफजाई के लिए💐💐💐
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