Thursday, March 11, 2021

कविता

[आज का दिन]
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आज देखी मैंने
खुली आँखों से ख़ुशबू
महक उठे हैं ख़्वाब सारे
खिल के हकीक़त में

आज छुआ इंद्रधनुष के सातों रंगों को
एक ही छुअन में
रंग गया है अंग-अंग 
अंतर्मन तक

भर लिया है आलिंगन में
सदियों की आरज़ू को
मेरी प्रार्थनाएँ साकार हो कर
बरसने लगी हैं सावन सी

भीग-भीग कर मैं
शीतल हुई जाती हूँ रोम-रोम
सिर से पाँव तक 
सभी दर्द और घाव तक

अपनी हथेलियों में भर ली हैं
आज मुस्कराहटें मैंने
ग़मों की बेरंग चिट्ठियां सारी
ढूढने लगीं हैं पते खुशियों के

आज का दिन रंग का है,नूर का है
उसके पास होने का है, किस्मत में जो दूर का है
आज का दिन ख़्वाबों के सच में बदलने का है
दुनियां की रवायतों से मुकरने का है.....

आज का दिन अजूबा है
क्योंकि दोनों ध्रुवों पर सूरज संग चमका
दोनों संग-संग पिघले
बहते गए संग-संग एक ही सैलाब में...

कि आज का दिन सदा के लिए यादों के इतिहास में दर्ज होने का दिन है...!!!

-सुमन शर्मा

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